‘मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ के ध्येय के साथ मातृत्व के महत्व पर दिया संदेश
*श्री प्रशांत जी हरतालकर ने ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर किया मार्गदर्शन*
*विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली मातृशक्तियों को ‘सप्त मातृका सम्मान’ से किया सम्मानित*
पंचकूला 10 अक्टूबर: "मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण" के ध्येय के साथ कार्यरत वैश्विक महिला संगठन विश्वमांगल्य सभा (हरियाणा प्रांत) द्वारा आज पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के ऑडिटोरियम में भव्य 'मातृ-सम्मेलन' का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में क्षेत्र की अनेक गणमान्य मातृशक्तियों एवं बुद्धिजीवियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का मंच संचालन श्रीमती संगीता बैंसला द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया तथा कार्यक्रम का मुख्य रूप से समन्वय श्रीमती किरण मलिक द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सांस्कृतिक भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति के साथ हुआ। तत्पश्चात् दीप प्रज्वलन किया गया और ओजस्वी शक्ति गान का स्वर गूंजा। मंचासीन अतिथियों का सम्मान, स्वागत एवं पूर्ण परिचय कराया गया। इसके बाद श्रीमती किरण मलिक ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की। तत्पश्चात सुश्री पूजा माधव देशमुख ने विश्वमांगल्य सभा की भूमिका एवं संकल्पना पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।
सभी माताओं को समझाया गया कि वे अपने बच्चों को नाजुक नहीं, बल्कि साहसी, आत्मनिर्भर और पुरुषार्थी बनने के लिए प्रेरित करें। देश की अनेकता में एकता को ध्यान में रखते हुए बच्चों को अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाएँ तथा जीवन की गलत आदतों और कुरीतियों को समाप्त करने में अपनी भूमिका निभाएँ।
स्थिर और सशक्त परिवार ही खुशियों का आधार है। परिवार से ही रिश्ते, खुशियाँ और प्रगति जुड़ी हुई हैं। उपस्थित माताओं को इन महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक किया गया तथा इस सार्थक पहल के लिए विश्व मंगल्य सभा का धन्यवाद किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रीमती गीता धामी ने भी अपने प्रेरणादायक संबोधन में कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं दीं। हरियाणा आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की गई तथा विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली महिलाओं को शुभकामनाएँ दी गईं। मातृत्व और एकल परिवारों से उत्पन्न समस्याओं एवं उनके समाधान पर प्रकाश डाला गया। महिलाओं को परिवार के महत्व के बारे में समझाया गया।
यह सभा मातृत्व के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। आज का मातृत्व इस चेतना को जागृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के मुख्य सत्र में मुख्य अतिथियों एवं मुख्य वक्ता श्री प्रशांत जी हरतालकर ने "युगानुकूल मातृत्व" विषय पर विस्तार से जानकारी दी और उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया।
माँ की महिमा बताते हुए जे.सी. बोस के शोध का उल्लेख किया गया, जिसमें पौधों में जीवन होने की बात कही गई। वक्ता ने अपना उपन्यास अपनी माता के साथ साझा किया और बताया कि यह सीख उन्हें बचपन में ही अपनी माँ से मिली थी। उन्होंने कहा कि माता कभी कुमाता नहीं होती।
इसके साथ ही एक अच्छी माँ बनने, मातृत्व के घटते महत्व और इस विषय पर समाज को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। इसके अलावा करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाए रखने पर चर्चा की गई। माताओं को अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने और उनके भावनात्मक विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया।
समारोह के विशेष आकर्षण "सप्त मातृका सम्मान" की भूमिका के बारे में श्रीमती बबीता मल्होत्रा ने विस्तार से बताया। इसके उपरांत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विशिष्ट माताओं को सप्त मातृका सम्मान से अलंकृत किया गया:
• शिक्षा क्षेत्र: कुलपति प्रोफेसर मीनाक्षी गोयल
• शक्ति क्षेत्र: श्रीमती कमलप्रीत कौर (HCS)
• सेवा क्षेत्र : श्रीमती तरुणा चोपड़ा
• धार्मिक क्षेत्र : पूज्य स्वामी डॉ. अमृता दीदी जी महाराज
• कला एवं क्रीडा क्षेत्र: श्रीमती शैली शर्मा एवं पहलवान गरिमा ढांडा
• उद्यमिता क्षेत्र: श्रीमती रूपाली वनीत जैन एवं श्रीमती अंबिका राणा ड्रोन दीदी
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला युवा विकास संगठन, अंबाला (समाजसेवी संस्था) ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान उनके वॉलंटियर्स ने संपूर्ण व्यवस्थाओं एवं कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम के ओजस्वी गायन के साथ राष्ट्रभक्तिपूर्ण वातावरण में हुआ।